चल भी नहीं पा रहा था 40 साल वर्षीय सर्वाइकल पेशंट, मैक्स अस्पताल पटपड़गंज में मिला सफल इलाज

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दिल्ली के पटपड़गंज स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में सर्वाइकल डिस्क की समस्या से जूझ रहे एक 40 वर्षीय मरीज का सफलता के साथ इलाज किया गया. बहुत ही एडवांस और सुरक्षित तरीके से इस मरीज का इलाज किया गया है, जिसके बाद वो फिर से बिना किसी सहारे के चल पाने में सक्षम हैं.

इसी केस के बारे में विस्तार से जानकारी देने के लिए दिल्ली-एनसीआर के लीडिंग अस्पतालों में शुमार मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पटपड़गंज ने मेरठ में आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए लोगों को जागरूक किया गया.

यहां डॉक्टरों की तरफ से 40 वर्षीय अखिलेश की कंडीशन के बारे में बताया गया. अखिलेश को बहुत ज्यादा कमजोरी हो गई थी और उनके चारों हाथ-पांव सुन्न पड़ गए थे. वो बिना सपोर्ट के खड़ा हो पाने में भी सक्षम नहीं थे, क्योंकि उनके हाथ-पांव में जान ही नहीं बची थी. अखिलेश के हाथों में झनझनाहट हो रही थी, वो सुन्न पड़ गए थे. हालात ये हो गए थे कि वो अपने हाथों से कुछ पकड़ भी नहीं पा रहे थे.

अखिलेश के कई तरह के टेस्ट किए गए. जांच में पता चला कि उन्हें प्रोलैप्स ऑफ इंटरवर्टेब्रल डिस्क (PIVD) था. अखिलेश को रीढ़ के सी3, सी4, सी5 और सी6 जोन में डिस्क प्रोलैप्स था, जिसके कारण रीढ़ की हड्डी पर भी दबाव पड़ रहा था.

अखिलेश के इलाज की प्रक्रिया को डॉक्टर अमिताभ गोयल ने विस्तार से समझाया. डॉक्टर गोयल, मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पटपड़गंज में न्यूरो सर्जरी के डायरेक्टर हैं. उन्होंने कहा, ‘’हमारी स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम ने एंटीरियर सर्वाइकल डिस्केक्टॉमी की, ताकि मरीज को दर्द से राहत मिल सके. गर्दन के सामने वाले हिस्से में बहुत मामूली कट लगाकर सर्वाइकल स्पाइन सर्जरी की गई और डैमेज डिस्क को हटाया गया. ये डिस्क सर्वाइकल क्षेत्र की दो वर्टेब्रल हड्डियों के बीच की नस को दबा रहा था. इसके अलावा बढ़ी हुई हड्डी (ओस्टियोफाइट्स) भी हटाई गई, इस तरह रीढ़ की हड्डी और नसों की जड़ों से दबाव को कम किया गया. क्योंकि नसों की जड़ों पर जो दबाव पड़ रहा था, उससे दर्द हो रहा था, कमजोरी आ रही थी, सुन्नता पैदा हो रही थी, झनझनाहट हो रही थी. डैमेज डिस्क को हटाने के बाद ये भी महत्वपूर्ण था कि कैसे सर्वाइकल वाले एरिया में स्थायित्व लाया जाए और उसको मजबूती प्रदान की जाए. इसके लिए डैमेज डिस्क की जगह हड्डी के टिशू लगाए गए. मरीज की हड्डी से ही ये टिशूज लिए गए और सी3-सी4, सी4-सी5, सी5-सी6 पर लगाए गए. गर्दन को सही रखने के लिए एंटीरियर सर्वाइकल प्लेट भी लगाई गई. ये सर्जरी बहुत ही सफल रही और मरीज को इसके बाद किसी तरह की कोई दिक्कत महसूस नहीं हुई. सर्जरी के अगले ही दिन मरीज के हाथ-पांव में ताकत का एहसास होने लगा और कुछ हफ्ते गुजर जाने के बाद उनके शरीर में पूरी ताकत वापस आ गई.’’

डॉक्टर अमिताभ गोयल ने ये भी बताया कि भले ही कोई मरीज किसी भी आयु का हो, और उसे रीढ़ से जुड़ी कितनी भी समस्याएं हों, ये सर्जरी उनके लिए बेहद सुरक्षित है. साइंस एंड टेक्नोलॉजी में हो रही तरक्की ने इस तरह की सर्जरी को बहुत सुरक्षित, तीव्र बनाने के साथ-साथ कम दर्दनाक बना दिया है.

न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में हुए एडवांसमेंट ने सर्जरी के तरीकों को बदल दिया है. यहां तक कि मुश्किल से मुश्किल स्पाइनल सर्जरी भी अब सक्सेसफुली कर ली जाती हैं. और इस क्षेत्र में मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पटपड़गंज वर्षों से मरीजों को बेहतर इलाज दे रहा है. अस्पताल के पास नई तकनीक, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ साथ स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम है, जिसके चलते यहां मरीजों का बेस्ट इलाज हो पाता है.

 

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