महानवमी पर ऐसे करें मां को प्रसन्न, करेंगी सभी मनोकामना पूरी

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शरद ऋतु के नवरात्री के नवें दिन होगी सिद्धिदात्री की पूजा होती है। उपासना व्रत का तप पुजन साधना सिद्धि और प्राप्त होती है। विजय प्राप्त का आशीर्वाद ग्रहण करके विजय दशमी मानते हैं।

  1.  महानवमी पर ऐसे करें मां को प्रसन्न, करेंगी सभी मनोकामना पूरी

नवरात्रि के 9वें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. इस दिन जिन लोगों ने व्रत रखा वे सभी अपना उपवास खोलते हैं. साथ ही छोटी कन्याओं को भोजन करवाते हैं और उनसे आशीर्वाद लेते हैं.

शारदीय नवरात्रि 2022: नौ दिनों तक चलने वाला शुभ त्योहार शरद नवरात्रि पूरे देश में बहुत धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया जाता है. इस दौरान भक्त नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ अवतारों की पूजा करते हैं. नौवां दिन, यानि महानवमी, देवी दुर्गा के नौवें रूप मां सिद्धिदात्री को समर्पित होता है. ऐसा माना जाता है कि देवी दुर्गा ने इस दिन राक्षस महिषासुर का वध किया था, और इसलिए उन्हें महिषासुर मर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है.

 

महानवमी तिथि और शुभ मुहूर्त

 

द्रिक पंचांग के अनुसार, महानवमी का शुभ मुहूर्त 3 ​​अक्टूबर को शाम 04:37 बजे शुरू होगा और 4 अक्टूबर को दोपहर 02:20 बजे समाप्त होगा. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:38 बजे से शुरू होकर 05:27 बजे समाप्त होगा. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:46 से दोपहर 12:33 तक जबकि विजय मुहूर्त दोपहर 02:08 से दोपहर 02:55 तक रहेगा.

 

क्या है पूजा विधि?

 

महानवमी दुर्गा पूजा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है. पूजा की रस्में महास्नान और षोडशोपचार पूजा से शुरू होती हैं और कन्यापूजन के साथ संपन्न होती हैं. इस दिन छोटी लड़कियों को पूजा करने के लिए आमंत्रित किया जाता है और साथ ही उन्हें खाना खिलाया जाता है. इसी तरह से अगर किसी का व्रत है तो छोटी कन्यायों को भोजन करवाकर अपना उपवास खोला जाता है. साथ ही उनका आशीर्वाद लिया जाता है.

 

नवमी का मंत्र

 

महा नवमी पर “ॐ देवी सिद्धिदात्रै नमः” का जाप करके देवी सिद्धिदात्री से आशीर्वाद लें.

 

मां सिद्धिदात्री मंत्र

 

बीज मंत्र – ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम: (नवमी पर 1100 बार जाप से मिलेगा लाभ)

 

प्रार्थना मंत्र – सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।

सेव्यमाना यदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायनी॥

 

इस दिन का महत्व

 

देवी सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों की स्रोत हैं और सभी आठ अष्टसिद्धियों को धारण करती हैं. देवी की पूजा करने से सहस्रार चक्र उत्तेजित होता है. हिंदू शिलालेखों के अनुसार, वह अपने भक्तों को अच्छे भाग्य का आशीर्वाद देती है और उन्हें मोक्ष प्रदान करती है.

 

क्या लगाएं भोग

 

इस दिन मां सिद्धिदात्री को नारियल, खीर और पंचामृत का भोग लगाएं. कन्या पूजा करते समय, भक्त देवी को पूरी, हलवा और काले चने चढ़ाते हैं.

करनी चाहिए। मां भगवती का स्मरण, ध्यान, पूजन, हमें इस संसार की असारता का बोध कराते हुए वास्तविक परम शांतिदायक अमृत पद की ओर ले जाने वाला है।

 

इनकी आराधना से जातक को अणिमा, लधिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व, सर्वकामावसायिता, दूर श्रवण, परकामा प्रवेश, वाकसिद्ध, अमरत्व भावना सिद्धि आदि समस्त सिद्धियों नव निधियों की प्राप्ति होती है। आज के युग में इतना कठिन तप तो कोई नहीं कर सकता लेकिन अपनी शक्तिनुसार जप, तप, पूजा-अर्चना कर कुछ तो मां की कृपा का पात्र बनता ही है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। मां जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में नवमी के दिन इसका जाप करना चाहिए।

 

या देवी सर्वभू‍तेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

 

अर्थ : हे मां! सर्वत्र विराजमान और मां सिद्धिदात्री के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे मां, मुझे अपनी कृपा का पात्र बनाओ

 

नवरात्रि नवमी मां सिद्धिदात्री आरती

 

नवरात्रि की महानवमी 4 अक्टूबर 2022 को है. इस दिन मां दुर्गा के नौवीं शक्ति देवी सिद्धिदात्री की की पूजा होती है. मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री को सिद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाली देवी माना गया है. देवी के यह स्वरूप बहुत शक्तिशाली है. देवी-देवता, गंधर्व, मनुष्य सभी को इन्हीं के आशीर्वाद से सिद्धियां मिलती हैं.

 

जिस पर मां सिद्धिदात्रि प्रसन्न हो जाएं उसके पास ब्रह्मांड को प्राप्त करने की शक्ति आ जाती है. देवीपुराण के अनुसार मां सिद्धिदात्री की अनुकम्पा से ही भगवान शंकर थी का आधा शरीर देवी का हुआ था, तभी से भोलेनाथ को अर्द्धनारीश्वर कहा गया. आइए जानते हैं नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की आरती

 

मां सिद्धिदात्री आरती

 

जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता।

 

तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।

 

तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।

 

तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।

 

कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।

 

जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।

 

तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है।

 

तू जगदंबे दाती तू सर्व सिद्धि है।

 

रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।

 

तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।

 

तू सब काज उसके करती है पूरे।

 

कभी काम उसके रहे ना अधूरे।

 

तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया।

 

रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।

 

सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली।

 

जो है तेरे दर का ही अंबे सवाली।

 

हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।

 

महा नंदा मंदिर में है वास तेरा।

 

मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।

 

भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता।

 

जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता।

 

तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।

आचार्य प्रदीप गोस्वामी

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