मां बगलामुखी देवी का साधना उपासना गुरु गंभ्य है

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बगलामुखी का साधक अजातशत्रु होता है इसका अर्थ ये भी है कि भगवती अपने साधक का भक्त का और बालक का कभी अहित होने नही देती इसका कोई शत्रु बन भी नही सकता क्योंकि अगर तुम सत्य प्रिय और धर्म प्रिय हो और देवी के भक्त भी हो तो ये अंतिम सत्य तक तुम्हे ले ही जाती है इसके दरबार मे कोई तू तू में में नही होती जहा कोई शत्रु अपनी जिह्वा से जुठ या गलत विचार लेके बोलता है वही पर ये विद्या उसको उल्टी पड़ती है इसलिए इसे विपरीत प्रत्यंगिरा भी कहते है क्योंकि इसका तेज सीधा आत्मा से निकलता है कोई कितना भी प्रपंच करले जुठ बोलले नाटक करले या सत्य को छुपाने की कोशिश करले परिणाम अंतिम सत्य का आके ही रहता है

 

ये शत्रु के घमंड को चकनाचूर कर देती है चाहे वो राजा हो उच्चाधिकारी हो प्रकांड पंडित हो मायावी हो बगलामुखी के तेज के सामने ढेर हो जाती है

 

इनके साधक और भक्त ये भी अवश्य ध्यान रखे ये नीतिज्ञ विद्या है अगर तुम गलत हुए तुमने पाप किये या किसी पापी को सहाय की तो ये तुम्हे भी नही छोड़ेगी चाहे तुम अनुष्ठान करलो जप करलो या पूर्ण अभिषेक करलो

ये अत्यंत सवेंदनशील है और जो अपनी जिह्वा को लगाम नही देते इसके लिए वल्गा अभिशाप है

जो न्याय के पक्ष में नही है सत्य के पक्ष में नही है जो अधर्म को साथ देने वालो में से है इनका तो ये पूरा निकंदन कर देती है

 

इसलिए दशमहाविद्या में ये विद्या को सेनापति या दंड़नाथा कहा गया है यह ब्रह्मांड की अंतिम निर्णय शक्ति है।।

आचार्य प्रदीप गोस्वामी

मां बगलामुखी धाम यज्ञशाला श्री दक्षिणेश्वरी काली पीठ प्राचीन वन खंडेश्वर महादेव शिव मंदिर कैलाश प्रकाश स्टेडियम चौराहा साकेत मेरठ

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